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अध्याय 4: मशीन लर्निंग (भाग 1)
सीखने के तीन मुख्य तरीके · नियरेस्ट नेबर्स और रिकमेंडेशन सिस्टम।
नियरेस्ट नेबर्स और रिकमेंडेशन सिस्टम
हम दूरी मापने के गणितीय तरीकों (Distance Metrics) को समझते हैं, जहाँ विद्यार्थी सीखते हैं कि कैसे एल्गोरिदम बहु-आयामी स्पेस (Multi-Dimensional Space) में यूक्लिडियन दूरी (Euclidean Distance) नापकर उन चीजों को खोजता है जो एक-दूसरे से सबसे ज्यादा मिलती-जुलती हैं। यही गणित k-नियरेस्ट नेबर्स (k-NN - दूरी और समानता के हिसाब से चीजों को पहचानना) एल्गोरिदम को चलाता है और आज के आधुनिक कोलैबोरेटिव फिल्टरिंग (Collaborative Filtering - मिलती-जुलती पसंद वाले लोगों के व्यवहार के आधार पर नई चीजों का सुझाव देना) वाले रिकमेंडेशन सिस्टम (Recommendation Systems) की रीढ़ है।
जब स्ट्रीमिंग वेबसाइटें (Streaming Platforms) या ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स (Shopping Sites) हमें नई फिल्में या सामान सुझाते हैं, तो वे उन यूजर्स का एक समूह (Cluster) खोजते हैं जिनका पुराना व्यवहार और पसंद हमारी तरह होती है, और फिर वे एक-दूसरे की पसंद को आपस में सुझाते हैं। हम इस तकनीक से जुड़े सामाजिक जोखिमों को भी देखते हैं, खास तौर पर यह कि कैसे ये एल्गोरिदम हमें फिल्टर बबल्स (Filter Bubbles - एल्गोरिदम द्वारा सिर्फ वही चीजें दिखाना जो यूजर की पुरानी पसंद से मिलती हों) और इको चैंबर्स (Echo Chambers - ऐसी जगह जहाँ सिर्फ अपनी ही सोच जैसी बातें बार-बार सुनाई देती हैं) में कैद कर देते हैं। हमारे क्षेत्रीय मेलों (मेल) या समाज की सामूहिक सभाओं में, खेती-बाड़ी का ज्ञान भी इंसानी कोलैबोरेटिव फिल्टरिंग (Collaborative Filtering) के जरिए ही फैलता है: अगर दो किसानों की जमीन की परिस्थितियाँ और पानी जमा करने वाले कुण्ड की क्षमता एक जैसी होती है, तो एक किसान जिस बींज (बीज) से अच्छी फसल पाता है, वही बीज स्वाभाविक रूप से दूसरे किसान को भी सुझाया जाता है।
रिग्रेशन और भविष्यवाणी करने वाली रेखाएँ
जब हमें किसी अलग-अलग श्रेणी (Category) के बजाय कोई लगातार बदलने वाली संख्या (Continuous Numerical Value) का अंदाजा लगाना होता है, तो हम रिग्रेशन एनालिसिस (Regression Analysis - लगातार बदलने वाले अंकों या रुझानों की भविष्यवाणी करना) का उपयोग करते हैं। हम शुरुआत लीनियर रिग्रेशन (Linear Regression - सीधी रेखा के जरिए रुझान का अंदाजा लगाना) से करते हैं, जहाँ एल्गोरिदम बिखरे हुए डेटा पॉइंट्स (Scatter Plots) के बीच से एक सबसे सही सीधी रेखा (Trend Line) खींचता है। इसके लिए वह वेट कोएफिशिएंट्स (Weight Coefficients) और बेसलाइन इंटरसेप्ट (Intercept) को गणितीय रूप से सबसे बेहतर (Optimize) बनाता है। विद्यार्थी सीखते हैं कि कैसे इस तकनीक से लगातार बदलने वाले नतीजों की भविष्यवाणी की जा सकती है, जैसे पिछले सालों के बारिश के मिलीमीटर आंकड़ों के आधार पर किसी पालड़-जोहड़ में जमा होने वाले पानी की मात्रा का अंदाजा लगाना।
इसके बाद हम लॉजिस्टिक रिग्रेशन (Logistic Regression - 0 और 1 के बीच की संभावनाओं को मापना) को समझते हैं, जो एक S-आकार के सिगमॉइड कर्व (Sigmoid Curve) का उपयोग करके लीनियर गणनाओं को 0 और 1 के बीच की संभावना (Probability) में बदल देता है। यह तकनीक हाँ या ना (Binary Outcomes) वाले नतीजों की भविष्यवाणी के लिए बहुत काम आती है, जैसे पढ़ाई के घंटों के आधार पर किसी विद्यार्थी के परीक्षा में पास होने की संभावना का हिसाब लगाना, या मिट्टी की नमी के आधार पर यह अंदाजा लगाना कि सूखा सहने वाली सेवण घास की फसल सफल होगी या नहीं।