चरण 7 / 15
अध्याय 3: रीयल वर्ल्ड एआई और अनिश्चितता (भाग 2)
नेव बेज और टेक्स्ट क्लासिफिकेशन।
सीखने के तीन मुख्य तरीके
मशीन लर्निंग (Machine Learning) कंप्यूटर को इस काबिल बनाती है कि वह बिना किसी पक्के और तय नियम के, खुद से डेटा के अंदर छिपे पैटर्न को खोज सके। हम इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले सीखने के तीन मुख्य तरीकों (Learning Paradigms) को समझते हैं:
- सुपरवाइज्ड लर्निंग (Supervised Learning - सही जवाबों के साथ लेबल किए गए डेटा से मशीन को सिखाना): इसमें एल्गोरिदम (Algorithm) को ऐसा डेटा दिया जाता है जिसमें पहले से सवाल और उसके सही जवाब (Labels) दोनों मौजूद होते हैं। धीरे-धीरे, मशीन इन दोनों के बीच का संबंध समझ जाती है और नए सवालों के सही जवाब देने लगती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई बुजुर्ग किसान लावणी (फसल कटाई) के समय किसी युवा को सिखाता है कि भण्डारण के लिए सूखी सांगरी (खेजड़ी की फली) कैसी दिखती है और पशुओं के चारे के लिए हरी गोबालिया (ताजी हरी पत्तियाँ) कैसी होती हैं। वह उदाहरण दिखा-दिखाकर (Labeled Examples) सही पहचान करना सिखाता है।
- अनसुपरवाइज्ड लर्निंग (Unsupervised Learning - बिना किसी बाहरी मदद के खुद से पैटर्न खोजना): इस तरीके में एल्गोरिदम को बिना किसी लेबल वाला (Unlabeled Data) दिया जाता है और उसे बिना किसी बाहरी मदद या पहले से तय श्रेणियों के, खुद ही डेटा के अंदर मौजूद स्वाभाविक समूहों, गुच्छों (Clusters) या ढांचे को खोजना होता है। यह प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही है जैसे हमारे पशुपालक और अनुभवी किसान बिना किसी किताबी परिभाषा के, केवल पानी के बहाव, मिट्टी की बनावट और वहाँ उगने वाली कंटीली झाड़ियों जैसे सामान्य लक्षणों को देखकर ही अपने क्षेत्र की अलग-अलग मिट्टियों को स्वाभाविक रूप से अलग-अलग समूहों (Clusters) में बांट देते हैं, जैसे रेतीली (रेतीली), पथरीली (मगरा), या दोमट (मटियार)।
- रीइन्फोर्समेंट लर्निंग (Reinforcement Learning - माहौल में कोशिशें करके और इनाम या सजा से सबक लेकर सीखना): इसमें एक एजेंट (Agent) किसी माहौल में खुद से अलग-अलग कोशिशें (Actions) करता है। सही काम करने पर उसे इनाम (Reward) मिलता है और गलत करने पर सजा या नुकसान (Penalty)। इस तरह लगातार कोशिशों और गलतियों से वह सही रास्ता सीख लेता है। यह ठीक वैसा है जैसे कोई छोटा तोड़ो (नवजात ऊँट) रायका पशुपालक की देखरेख में रेगिस्तान के पथरीले और रेतीले रास्तों पर चलना सीखता है। वह खुद शारीरिक संतुलन बनाता है, ठोकर खाता है, और माहौल से मिलने वाले फीडबैक से धीरे-धीरे सही चलना सीख जाता है।