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अध्याय 1: एआई क्या है? (भाग 2)

मन और समझ का दर्शन।

मन और समझ का दर्शन

हम यह कैसे परख सकते हैं कि कोई मशीन वाकई में समझदार है या नहीं? इसके लिए हम ऐलन ट्यूरिंग के प्रसिद्ध इमिटेशन गेम यानी ट्यूरिंग टेस्ट (Turing Test - मशीन की समझ को परखने का एक प्रसिद्ध तरीका) को समझते हैं। इसमें एक इंसान लिख-पढ़कर एक साथ किसी मशीन और किसी दूसरे इंसान से बातचीत करता है और यह पहचानने की कोशिश करता है कि मशीन कौन है। हालाँकि यह टेस्ट बहुत मशहूर है, लेकिन इसकी आलोचना भी होती है क्योंकि यह सिर्फ यह मापता है कि कोई मशीन इंसान जैसी बातचीत की कितनी अच्छी नकल (Simulation) कर सकती है, न कि यह कि वह वाकई में कुछ समझ रही है या नहीं।

इस बात को गहराई से समझने के लिए हम जॉन सर्ल के चाइनीज रूम (Chinese Room - यह समझने का एक विचार-प्रयोग कि क्या मशीनें वाकई अर्थ समझती हैं या सिर्फ नियमों के हिसाब से प्रतीक बदलती हैं) विचार-प्रयोग को देखते हैं। कल्पना कीजिए कि एक व्यक्ति किसी बंद कमरे में बैठा है जिसे चीनी भाषा बिल्कुल नहीं आती। लेकिन उसके पास अंग्रेजी में लिखी एक किताब है जिसमें साफ नियम दिए गए हैं कि बाहर से आने वाले चीनी प्रतीकों के बदले में कौन-से चीनी प्रतीक बाहर भेजने हैं। बाहर खड़े व्यक्ति को लगेगा कि कमरे के अंदर बैठा इंसान चीनी भाषा समझता है; लेकिन अंदर असल में बिना किसी अर्थ को समझे केवल नियमों के हिसाब से प्रतीकों को बदला जा रहा है। आधुनिक एआई (AI) को परखते समय सिंटैक्स (Syntax - केवल नियमों के हिसाब से प्रतीकों को बदलना) और सिमेंटिक्स (Semantics - उन प्रतीकों का असली अर्थ समझना) के बीच का यह फर्क समझना बहुत जरूरी है, ताकि हम यह जान सकें कि मशीनें वाकई भाषा समझ रही हैं या सिर्फ समझदारी की नकल कर रही हैं।

अंत में, हम एआई सिस्टम (AI Systems) को उनकी क्षमता के हिसाब से बाँटते हैं: