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चरण 12 / 15

अध्याय 5: न्यूरल नेटवर्क और डीप लर्निंग (भाग 1)

जैविक दिमाग से लेकर आर्टिफिशियल नोड्स तक · नेटवर्क की बनावट और बैकरोपोगेशन।

जैविक दिमाग से लेकर आर्टिफिशियल नोड्स तक

डीप लर्निंग (Deep Learning) की पूरी बनावट हमारे इंसानी दिमाग के न्यूरोबायोलॉजी (Neurobiology) से प्रेरित है। हम जैविक न्यूरॉन (Biological Neuron) की कार्यप्रणाली को समझते हैं, जहाँ डेंड्राइट्स (Dendrites) बाहर से संकेत ग्रहण करते हैं, सेल बॉडी (Cell Body) उन्हें प्रोसेस करती है, और एक्सॉन (Axons) उन बिजली जैसे संकेतों को सिनैप्स (Synapses) के रास्ते आगे भेजते हैं। हम पारंपरिक कंप्यूटरों की काम करने की शैली (जहाँ एक CPU अलग रखी RAM से एक-एक करके डेटा लाता है) की तुलना न्यूरल नेटवर्क (Neural Networks) के पैरेलल और फैले हुए ढांचे (Parallel Distributed Architecture) से करते हैं, जहाँ याददाश्त और गणना करने की शक्ति पूरे नेटवर्क के आपस में जुड़े नोड्स (Nodes) में एक साथ फैली होती है।

डेटा प्रोसेसिंग के इस विकेंद्रीकृत (Distributed) ढांचे को एक अकेले केंद्रीकृत CPU की तुलना हमारे गाँव की विकेंद्रीकृत पंचायत से करके समझा जा सकता है। एक केंद्रीकृत सिस्टम में, कोई एक अकेला यूनिट सारे फैसले क्रम से (Sequentially) लेता है। लेकिन एक पंचायत में फैसले लेने की शक्ति विकेंद्रीकृत होती है: यहाँ हर बुजुर्ग या पंच एक आपस में जुड़े नोड (Node) की तरह काम करता है, जो अलग-अलग सबूतों और समुदाय की राय को एक साथ (Parallel) समझता और तौलता है। इन सभी के अलग-अलग आकलनों को जोड़ा जाता है, और पूरे नेटवर्क की सामूहिक और संतुलित सहमति (Weighted Consensus) से ही एक सही फैसला बाहर आता है।

नेटवर्क की बनावट और बैकरोपोगेशन

हम कदम-दर-कदम आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क (Artificial Neural Networks) बनाते हैं, जहाँ आर्टिफिशियल न्यूरॉन्स को व्यवस्थित परतों (Layers) में सजाया जाता है:

इन मल्टीलेयर परसेप्ट्रॉन्स (Multilayer Perceptrons) को सिखाने के लिए हम बैकरोपोगेशन एल्गोरिदम (Backpropagation Algorithm - गलती होने पर नेटवर्क में पीछे की तरफ संदेश भेजकर हर कड़ी के वजन या महत्व को सुधारने का तरीका) का उपयोग करते हैं, जिसे गणितीय रूप से सेप्पो लिनाइनमा ने विकसित किया था। जब कोई न्यूरल नेटवर्क कोई भविष्यवाणी करता है, तो आउटपुट लेयर पर यह देखा जाता है कि उससे कितनी गलती (Error) हुई। फिर इस गलती के संदेश को नेटवर्क में पीछे की तरफ भेजा जाता है। जैसे-जैसे यह संदेश पीछे जाता है, कैलकुलस (Calculus) के चेन-रूल (Chain-Rule) के जरिए हर कनेक्शन के वजन (Weight) को थोड़ा-थोड़ा सुधारा जाता है, जिससे धीरे-धीरे गलतियाँ कम होती जाती हैं।

गलतियों से सीखकर पीछे की तरफ सुधार करने की यह प्रक्रिया हमारे पारंपरिक कुम्हार (कुम्हार) की उस कला के बिल्कुल समान है जिससे वह चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाता है। जब चाक पर घूमते हुए किसी बर्तन के ऊपरी किनारे (Rim) पर थोड़ा-सा भी असंतुलन या डगमगाहट दिखती है, तो कुम्हार उस बर्तन को फेंकता नहीं है; बल्कि वह उस गलती के कारण को ऊपर के किनारे से पीछे की तरफ खोजते हुए बर्तन की दीवारों से लेकर नीचे आधार पर अपने अँगूठों के दबाव तक जाता है। गलती दिखने पर अपने हाथों के दबाव और तकनीक को पीछे की तरफ (Backward) लगातार सुधारते हुए, वह धीरे-धीरे सारी गलतियाँ खत्म कर देता है जब तक कि बर्तन पूरी तरह संतुलित और सुडौल नहीं बन जाता।